रातों का मंज़र ‪‎अज़ीब‬ लगता है……साया तेरी यादों का करीब लगता है, लहरें आकर वापिस हो जाती है,वो साहिल ‪‎तन्हा‬ अज़ीब लगता है. उसको ‪‎यादों‬

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