चाँद भी छिप जाता है उसकेमुस्कुराने सेदिन भी ढल जाता है उसके उदास होजाने सेक्यूँ वो नही समझ पाते हैं हाल-ए-दिल मेराके जीना छोड़ देते

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तुझे चाहते हैं बेईन्तहा , पर चाहना नही आता…ये कैसी मोहब्बत हैँ कि ,हमे कहना नही आता…जिन्दगी मेँ आ जाओ,हमारी जिन्दगी बन कर,कि तेरे बिन

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हमने चाहा बहुत पर इज़हार कर ना सके,कट गई उमर पर ‪‎प्यार‬ कर ना सके,उसने माँगी भी तो हमसे जुदाई माँगी,और हम थे की इनकार

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अपना बना कर भुला रहा है कोई,ख्वाब दिखा कर रुला रहा है कोई,मर जाएँगे बिन उनके हम,यह जानते हुए भी दूर जा रहा है कोई

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